हिन्दी / C1

नीला सियार

Short story

एक जंगल में चंडरव नाम का सियार रहता था। एक दिन भूख से व्याकुल होकर वह खाने की तलाश में शहर के भीतर चला गया। वहाँ के कुत्तों की नज़र उस पर पड़ी, तो वे चारों ओर से भौंकते हुए उसके पीछे दौड़ पड़े। देखते-देखते उन्होंने उसे घेर लिया और अपने नुकीले दाँतों से काटने लगे।

सियार जान बचाकर निकट के एक रंगरेज़ के घर में घुसा, जहाँ कपड़ों को रंगने के लिए नीले रंग का एक बड़ा बर्तन तैयार रखा था। कुत्तों से बचने की कोशिश में वह उसमें जा गिरा। जब तक बाहर निकल पाया, उसका सारा शरीर नीला हो चुका था। जो कुत्ते उसका पीछा कर रहे थे, वे अब उसे पहचान ही नहीं सके और अपनी-अपनी दिशा में चले गए। सियार ने शहर से काफी दूर निकलकर जंगल की राह ली।

उसका अपरिचित रूप देखते ही जंगल के जानवरों में आतंक फैल गया। शेर, बाघ, तेंदुए और भेड़िए तक वहाँ से भागने लगे। वे एक-दूसरे से कह रहे थे कि इस जीव के स्वभाव, ताकत या व्यवहार के बारे में उन्हें कुछ मालूम नहीं है; उससे दूर रहने में ही भलाई है।

सियार ने उनकी घबराहट भाँपकर पुकारा, “अरे, मुझे देखते ही इस तरह क्यों भाग रहे हो? भय की कोई बात नहीं। स्वयं ब्रह्मा ने मुझे बनाया और कहा कि जंगल के जानवरों का कोई राजा नहीं है। उन्होंने मुझे ककुद्द्रुम नाम देकर तुम सब पर राज करने के लिए भेजा है। मेरा काम तुम्हारी रक्षा करना है। अब तुम सब मेरी छत्रछाया में रहो।”

यह सुनकर शेर और अन्य जानवर उसके चारों ओर इकट्ठे हो गए। वे उसे अपना स्वामी कहकर उसके आदेश की प्रतीक्षा करने लगे। सियार ने शेर को मंत्री का पद दिया, बाघ को अपने शयनस्थान की देखभाल का काम सौंपा और भेड़िए को द्वार पर पहरा देने के लिए रखा। तेंदुए को उसने पान पहुँचाने की ज़िम्मेदारी दी। इस तरह हर एक को दरबार में जगह मिल गई।

पर जिन सियारों से उसका अपना संबंध था, उनके लिए वहाँ कोई स्थान नहीं था। उसने उनसे बातचीत करना भी बंद कर दिया और सबको बाहर निकलवा दिया। अब वह उन्हीं जानवरों से घिरा रहता था जो उसके अनोखे रंग के कारण उसे अपना राजा मान बैठे थे।

शेर और दूसरे शिकारी जानवर शिकार मारकर उसके सामने लाते। वह राजा की तरह उस भोजन का बँटवारा करता और सबको उनका हिस्सा देता। दिन इसी व्यवस्था में बीतने लगे। जंगल के शक्तिशाली जानवर उसके लिए शिकार करते थे और वह उनके बीच बैठकर शासन करता था।

फिर एक दिन दूर कहीं सियारों का झुंड ऊँची आवाज़ में बोलने लगा। अपने साथियों की आवाज़ सुनकर चंडरव खुशी से भर उठा। उसकी आँखें आँसुओं से भर आईं, शरीर में रोमांच हो आया और वह उठकर पूरे ज़ोर से हुआँ-हुआँ करने लगा। राजा ककुद्द्रुम की आवाज़ किसी साधारण सियार की आवाज़ से अलग नहीं थी।

शेर और उसके साथियों ने सुना, तो भेद खुल गया। कुछ क्षण वे लज्जा से सिर झुकाए खड़े रहे। फिर बोले, “हम एक मामूली सियार के धोखे में आ गए! इसे मार डालना चाहिए।”

यह सुनते ही सियार वहाँ से भागना चाहता था। लेकिन उसे निकलने का अवसर नहीं मिला। शेर और अन्य जानवरों ने उसे वहीं मार डाला।

उसके शरीर पर चढ़ा रंग बाकी सियारों से अलग था, उसकी आवाज़ नहीं। अनजान रूप को देखकर जो जानवर भाग खड़े हुए थे, वे उसी परिचित आवाज़ को सुनकर समझ गए कि उनके सामने कौन है। राज करने का उसका दावा उस एक आवाज़ के आगे टिक नहीं सका।


English summary · includes the ending

A hungry jackal enters a town, where dogs chase and bite him. He escapes into a clothes dyer’s house and falls into a large pot of blue dye. When he climbs out, the dogs no longer recognize him.

Back in the forest, his strange colour frightens even the lions and tigers. He tells them that the creator has sent him to be their king and protector. They believe him. He gives important jobs to several animals, sends away the other jackals, and shares out the food that the hunters bring him.

One day he hears jackals calling in the distance. Overcome with joy, he begins to howl with them. His voice reveals what he really is. The animals are ashamed that an ordinary jackal has deceived them. He tries to escape, but they kill him. His unusual appearance hid his identity until his own voice gave him away.

Adapted for Lejrbål from the credited source.
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