हिन्दी / B2
नीला सियार
एक जंगल में चंडरव नाम का सियार रहता था। एक दिन भूख से परेशान होकर वह भोजन की खोज में शहर जा पहुँचा। वहाँ के कुत्तों ने उसे देखते ही घेर लिया। वे भौंकते हुए उसके पीछे दौड़े और अपने नुकीले दाँतों से उसे काटने लगे।
प्राण बचाने के लिए सियार पास ही कपड़े रंगने वाले के घर में घुस गया। वहाँ नीले रंग से भरा एक बड़ा बर्तन रखा था। कुत्तों से बचते हुए वह उसी में जा गिरा। जब बाहर निकला, तो उसका पूरा शरीर नीला हो चुका था। कुत्तों ने इस बदले हुए रूप में उसे पहचाना ही नहीं और अलग-अलग दिशाओं में चले गए। सियार वहाँ से काफी दूर जाकर जंगल की ओर मुड़ गया।
उस अनोखे रंग वाले जीव को देखकर जंगल में हड़कंप मच गया। शेर, बाघ, तेंदुए और भेड़िए तक डर के मारे भागने लगे। वे आपस में कह रहे थे कि न तो वे इस जीव को जानते हैं, न उसकी ताकत का अनुमान लगा सकते हैं। उससे दूर रहना ही बेहतर होगा।
उनका डर देखकर सियार बोला, “तुम मुझे देखते ही क्यों भाग रहे हो? डरने की कोई बात नहीं है। भगवान ने मुझे बनाकर कहा कि जंगल के जानवरों का कोई राजा नहीं है। उन्होंने मुझे तुम सब पर राज करने और तुम्हारी रक्षा करने के लिए भेजा है। इसलिए अब तुम मेरी देखरेख में रहो।”
शेर और दूसरे जानवर उसे घेरकर आदेश माँगने लगे। सियार ने शेर को मंत्री बनाया, बाघ को अपने सोने की जगह की देखभाल सौंपी और भेड़िए को दरवाज़े पर पहरा देने का काम दिया। दूसरे जानवरों को भी उसने काम बाँट दिए। लेकिन अपने ही जैसे सियारों से उसने दूरी बना ली। उनसे बात करना तो दूर, उसने उन सबको निकाल दिया।
अब शेर और बाकी शिकारी जानवर शिकार करके उसके सामने लाते थे। वह राजा की तरह उसका बँटवारा करके सबको हिस्सा देता। इसी तरह उसका राज चलने लगा।
एक दिन दूर के इलाके से सियारों के झुंड की आवाज़ सुनाई दी। उसे सुनकर वह खुशी से भर उठा। उसकी आँखों में आँसू आ गए और वह उठकर ऊँची आवाज़ में सियारों की तरह बोलने लगा। उस पल वह अपनी बनाई पहचान भूल गया था।
शेर और उसके साथियों ने आवाज़ सुनी, तो समझ गए कि जिसे वे राजा मान रहे थे, वह एक सियार है। कुछ देर वे शर्म से सिर झुकाए खड़े रहे। फिर बोले, “इस सियार ने हमें धोखा दिया है। इसे मार डालो!”
यह सुनकर सियार भागना चाहता था, मगर शेर और बाकी जानवरों ने उसे वहीं मार डाला। जिस रंग को देखकर वे उसकी ताकत से डर गए थे, वह केवल कपड़े रंगने वाले का नीला रंग था। सियारों की आवाज़ का जवाब देते ही उसके राजा होने का दावा टूट गया।
English summary · includes the ending
A hungry jackal enters a town, where dogs chase and bite him. He escapes into a clothes dyer’s house and falls into a large pot of blue dye. When he climbs out, the dogs no longer recognize him.
Back in the forest, his strange colour frightens even the lions and tigers. He tells them that the creator has sent him to be their king and protector. They believe him. He gives important jobs to several animals, sends away the other jackals, and shares out the food that the hunters bring him.
One day he hears jackals calling in the distance. Overcome with joy, he begins to howl with them. His voice reveals what he really is. The animals are ashamed that an ordinary jackal has deceived them. He tries to escape, but they kill him. His unusual appearance hid his identity until his own voice gave him away.
Adapted for Lejrbål from the credited source.
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