हिन्दी / C1

गाने वाला गधा

Short story

एक गाँव में उद्धत नाम का गधा रहता था। दिन के समय उसे अपने स्वामी, एक धोबी, का बोझ ढोना पड़ता था; रात को खुला छोड़ दिए जाने पर वह मनमाने ढंग से घूमता और जहाँ कुछ खाने को मिलता, खा लेता। भोर होने से पहले वह स्वयं घर लौट आता, क्योंकि उसे डर था कि देर से लौटने पर उसकी यह आज़ादी छिन जाएगी और मालिक उसे बाँधकर रखने लगेगा।

एक रात घूमते-घूमते उसकी भेंट एक सियार से हुई। धीरे-धीरे दोनों में मित्रता हो गई और वे साथ-साथ भोजन खोजने लगे। गधा अपने मज़बूत शरीर के सहारे खेतों की बाड़ तोड़ देता, जिससे दोनों को भीतर घुसने का रास्ता मिल जाता। खीरों के खेतों में तो उनकी खूब दावत होती। रात भर पेट भरने के बाद सियार अपने ठिकाने लौटता और गधा धोबी के घर। इस तरह दोनों की रातें बड़े सुख से बीतने लगीं।

एक बार ऐसी ही दावत के बीच गधे ने सिर उठाकर आकाश की ओर देखा। रात निर्मल थी और चारों ओर चाँदनी बिखरी हुई थी। उसका हृदय उल्लास से भर उठा। अपने साथी को वह स्नेह से भांजा कहता था, जबकि सियार उसे मामा कहकर पुकारता था।

“भांजे,” गधे ने कहा, “देखो, कितनी रमणीय रात है! ऐसे समय मेरा मन गाने को हो रहा है। बताओ, कौन-सा राग सुनना चाहोगे?”

सियार ने उसे रोकते हुए कहा, “मामा, यह गाने का अवसर नहीं है। हम यहाँ चोरी करने आए हैं और चोरी करने वाले को अपनी उपस्थिति छिपाकर रखनी चाहिए। तुम्हारी आवाज़ शंख की तरह दूर तक गूँजती है। उसे सुनकर रखवाला जाग जाएगा और फिर हमें उसके डंडों का सामना करना पड़ेगा। अभी तो इन मीठे खीरों का आनंद लो।”

यह बात गधे को अखर गई। उसे लगा कि सियार संगीत के सौंदर्य को ही नहीं समझता। उसने कहा, “तुम जंगल में रहने वाले जीव हो; गीत का सुख क्या जानो! चाँदनी रात में अपने प्रियजनों के बीच संगीत सुनने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता।”

“संगीत के आनंद से मुझे इनकार नहीं,” सियार ने उत्तर दिया, “लेकिन तुम्हारी आवाज़ तो कर्कश है। तुम गाओगे नहीं, रेंकोगे। ऐसी आवाज़ निकालकर अकारण मुसीबत क्यों बुलाना?”

अब बात केवल गाने की इच्छा तक सीमित नहीं रही थी। गधे को लगा कि उसके ज्ञान का अपमान किया जा रहा है। वह बोला, “तो तुम्हारा मतलब है कि मैं संगीत नहीं जानता? सुनो, संगीत में सात स्वर होते हैं। स्वरों की अलग-अलग व्यवस्थाएँ हैं, जिन्हें ग्राम कहते हैं। ताल, लय, राग और रस भी हैं। इन सबका ज्ञान मुझे है।”

वह संगीत के भेद और उनकी संख्याएँ गिनाने लगा। उसके अनुसार गीत की शक्ति इतनी बड़ी थी कि उससे देवता भी प्रसन्न हो जाते थे। उसने पौराणिक कथा का यह उदाहरण भी दिया कि रावण ने तार वाले वाद्य के संगीत से भगवान शिव को प्रसन्न किया था। इतने सारे तर्क और नाम सुनाने के बाद उसे अपनी योग्यता पर संदेह का कोई कारण नहीं दिखाई देता था। वह किसी भी स्थिति में गाने से पीछे हटने को तैयार नहीं था।

सियार ने समझ लिया कि अब सावधानी की बात करना व्यर्थ है। उसने कहा, “यदि तुमने निश्चय कर ही लिया है, तो मैं बाड़ के बाहर खड़ा होकर रखवाले पर नज़र रखता हूँ। तुम निश्चिंत होकर अपनी इच्छा पूरी करो।”

वह बाहर निकल गया। गधे ने गर्दन उठाई और पूरे ज़ोर से रेंकना शुरू कर दिया। उसकी आवाज़ सुनते ही सोया हुआ रखवाला उठ बैठा। वह क्रोध में डंडा लेकर आया और गधे को तब तक पीटता रहा, जब तक वह धरती पर गिर नहीं पड़ा।

इसके बाद रखवाले ने अनाज कूटने की एक भारी ओखली उठाई। उसमें बने छेद से रस्सी निकालकर उसने उसे गधे की गर्दन में बाँध दिया और स्वयं फिर सो गया।

कुछ समय बीतने पर गधे में उठने की ताकत लौट आई। गर्दन में बँधी ओखली को घसीटते हुए वह बाड़ तक पहुँचा, उसे तोड़ा और किसी तरह खेत से बाहर निकल गया।

सियार दूर खड़ा यह दृश्य देख रहा था। गधे के गले में लटकती ओखली पर उसकी नज़र पड़ी तो वह मुस्कुरा उठा।

“मामा,” उसने कहा, “मेरी सलाह तुम्हें पसंद नहीं आई थी। पर तुम्हारे गायन पर कितना अद्भुत आभूषण भेंट किया गया है! ऐसा गहना तो मैंने आज तक नहीं देखा।”


English summary · includes the ending

A donkey works for a man who washes clothes for a living and wanders freely at night. He becomes friends with a jackal. Together they enter cucumber fields, eat their fill and leave before morning.

One clear night, the donkey wants to sing. The jackal warns him that they are stealing and must stay quiet. The donkey’s loud voice will wake the guard. Offended, the donkey boasts about his knowledge of music and refuses to listen. The jackal moves outside the field, saying he will watch for the guard.

As soon as the donkey starts braying, the guard wakes and beats him. He ties a heavy mortar—a bowl used for crushing grain—around the donkey’s neck, then goes back to sleep. The donkey eventually gets up, breaks through the fence and escapes with the mortar still attached. Seeing him, the jackal jokes that he has received a fine jewel as a reward for his singing.

A new Hindi adaptation for LEJRBÅL from the public-domain Sanskrit Panchatantra, Book V, the donkey-and-jackal tale (verses 49–57 and surrounding prose). Source continues at https://sa.wikisource.org/wiki/पञ्चतन्त्रम्_06क .
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