हिन्दी / B2
गाने वाला गधा
एक गाँव में उद्धत नाम का गधा रहता था। दिन भर वह धोबी का बोझ ढोता, लेकिन रात होते ही उसे खुला छोड़ दिया जाता। वह जहाँ चाहता, घूमता और खाने की तलाश करता। फिर सुबह होने से पहले घर लौट आता, ताकि मालिक उसे बाँधकर रखने की ज़रूरत न समझे।
इन्हीं रातों में उसकी एक सियार से दोस्ती हो गई। दोनों ने मिलकर खीरे के खेतों में जाना शुरू कर दिया। गधा अपने शरीर के ज़ोर से बाड़ तोड़ देता और दोनों भीतर घुसकर पेट भर खाते। इस तरह उनका काम मज़े से चल रहा था। रात भर खाने के बाद सियार अपने ठिकाने चला जाता और गधा धोबी के घर लौट आता।
एक रात आसमान बिल्कुल साफ़ था। चाँदनी में नहाए खेत में खड़े गधे का मन गाने को होने लगा। वह अपने साथी को प्यार से भांजा कहता था और सियार उसे मामा कहकर बुलाता था।
“भांजे,” उसने कहा, “देखो, कैसी सुंदर रात है! आज तो मुझे ज़रूर गाना चाहिए। बताओ, तुम्हारे लिए कौन-सा राग गाऊँ?”
सियार ने तुरंत मना किया। “मामा, हम यहाँ चोरी करने आए हैं। चोर का भला चुप रहने में है। तुम्हारी आवाज़ इतनी तेज़ है कि दूर तक सुनाई देगी। रखवाला सो रहा है; जाग गया तो हमें बुरी तरह पीटेगा। तुम आराम से खीरे खाओ और संगीत की बात भूल जाओ।”
गधे को अपने मित्र की सावधानी में समझदारी नहीं, बल्कि संगीत की नासमझी दिखाई दी। “तुम जंगल में रहने वाले जानवर हो,” उसने जवाब दिया। “संगीत का आनंद क्या जानो! चाँदनी रात में प्रिय लोगों के साथ बैठकर गीत सुनने का सुख ही अलग होता है।”
“यह तो सही है,” सियार ने माना, “लेकिन अच्छा संगीत सुनने और तुम्हारा रेंकना सुनने में फ़र्क है। अपनी आवाज़ के कारण तुम खुद को मुसीबत में डालोगे।”
अब गधा सचमुच नाराज़ हो गया। उसे यह बात मंज़ूर नहीं थी कि कोई उसके संगीत-ज्ञान पर सवाल उठाए। उसने सात सुरों से शुरू करके ताल, लय और संगीत की कई दूसरी बातों की सूची सुनानी शुरू कर दी। इतने नाम जानने के बाद भला उसे कौन अनजान कह सकता था? वह गाएगा ही।
सियार समझ गया कि आगे समझाने से कोई लाभ नहीं होगा। “अच्छा, मामा,” उसने कहा, “मैं बाड़ के बाहर जाकर देखता हूँ कि रखवाला तो नहीं आ रहा। तुम यहाँ जितना चाहो, गाओ।”
उसके बाहर निकलते ही गधे ने गर्दन उठाई और ज़ोर-ज़ोर से रेंकना शुरू कर दिया। जैसा सियार ने कहा था, आवाज़ सुनकर रखवाला जाग गया। वह डंडा लेकर दौड़ा और गधे को इतना मारा कि वह ज़मीन पर गिर पड़ा।
रखवाले ने अनाज कूटने का एक भारी बर्तन लिया और उसमें बने छेद से रस्सी डालकर गधे की गर्दन में बाँध दिया। फिर वह सोने चला गया। गधा कुछ देर तक पड़ा रहा, लेकिन जब उसमें उठने की ताकत आई, तो वह उस भारी बोझ को खींचता हुआ बाड़ तक पहुँचा। बाड़ तोड़कर वह किसी तरह खेत से बाहर निकल गया।
सियार कुछ दूर खड़ा था। उसने अपने दोस्त की गर्दन में लटका बोझ देखा और मुस्कुरा दिया।
“वाह, मामा! मेरी सलाह तो तुम्हें अच्छी नहीं लगी, मगर तुम्हारे गाने पर इतना अनोखा गहना मिला है! ऐसा शानदार इनाम मैंने पहले कभी नहीं देखा।”
English summary · includes the ending
A donkey works for a man who washes clothes for a living and wanders freely at night. He becomes friends with a jackal. Together they enter cucumber fields, eat their fill and leave before morning.
One clear night, the donkey wants to sing. The jackal warns him that they are stealing and must stay quiet. The donkey’s loud voice will wake the guard. Offended, the donkey boasts about his knowledge of music and refuses to listen. The jackal moves outside the field, saying he will watch for the guard.
As soon as the donkey starts braying, the guard wakes and beats him. He ties a heavy mortar—a bowl used for crushing grain—around the donkey’s neck, then goes back to sleep. The donkey eventually gets up, breaks through the fence and escapes with the mortar still attached. Seeing him, the jackal jokes that he has received a fine jewel as a reward for his singing.
A new Hindi adaptation for LEJRBÅL from the public-domain Sanskrit Panchatantra, Book V, the donkey-and-jackal tale (verses 49–57 and surrounding prose). Source continues at https://sa.wikisource.org/wiki/पञ्चतन्त्रम्_06क .
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