हिन्दी / C1
ढोल और सियार
भोजन की खोज में इधर-उधर भटकता हुआ एक भूखा सियार जंगल के उस हिस्से में जा पहुँचा जहाँ दो सेनाओं का युद्ध हुआ था। उसी मैदान में एक बड़ा नगाड़ा पड़ा था। हवा चलने पर आसपास की लताओं और पेड़ों की डालियाँ उसके चमड़े पर पड़ती थीं, जिससे गहरी और तेज़ आवाज़ उठती थी।
सियार ने नगाड़ा देखा नहीं था, केवल उसकी आवाज़ सुनी थी। वह बुरी तरह घबरा गया। उसे लगा कि कोई भयानक प्राणी आसपास है और उसके सामने पड़ना जान जोखिम में डालना होगा। जब तक वह उस अनदेखे प्राणी की नज़र में नहीं आया था, तब तक दूसरी ओर निकल जाना ही उसे उचित लगा।
मगर भागने से पहले उसने अपने विचार पर दोबारा गौर किया। भय और हर्ष, दोनों ही मनुष्य को बिना जाँचे कदम उठाने के लिए उकसा सकते हैं; सोच-विचार करने वाला ऐसी उतावली से बचता है। सियार ने भी निश्चय किया कि पहले आवाज़ का स्रोत जानेगा। अपने डर को सँभालते हुए वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा।
कुछ दूर जाने पर नगाड़ा दिखाई दिया। उसने पास पहुँचकर उसे पहचाना और उत्सुकता में स्वयं भी उस पर चोट की। अब उसके मन में भय के स्थान पर प्रसन्नता भर गई। इतनी बड़ी चीज़ देखकर उसे विश्वास होने लगा कि उसके भीतर मांस, चर्बी और खून का भरपूर भंडार होगा। बहुत समय बाद ऐसा भोजन हाथ लगने की कल्पना से वह खुश हो उठा।
इस कथित भंडार पर मोटे, सख्त चमड़े का आवरण था। सियार ने उसे दाँतों से फाड़ना शुरू किया। किसी तरह उसने एक ओर छेद बना लिया और भीतर जा घुसा, हालाँकि चमड़ा चीरने में उसके दाँत टूट गए थे।
अंदर पहुँचते ही उसका उत्साह समाप्त हो गया। न मांस मिला, न चर्बी, न खून। सारी वस्तु लकड़ी और चमड़े से बनी थी; उसके भीतर भोजन था ही नहीं। पहले उसने समझा था कि वह भरे हुए भंडार के सामने है, पर भीतर जाकर उसे मालूम हुआ कि वहाँ केवल उसका खाली ढाँचा था।
सियार की दोनों धारणाएँ एक ही वस्तु से बनी थीं। दूर से उसकी आवाज़ ने आतंक पैदा किया था; पास से उसके आकार ने लोभ जगाया। जाँचने पर दोनों धारणाएँ गलत निकलीं। कथा की सीख यही है कि केवल आवाज़ के ज़ोर को देखकर भयभीत नहीं होना चाहिए। उसके पीछे वास्तव में क्या है, यह जानना अलग बात है।
English summary · includes the ending
A hungry jackal comes to a place in the forest where two armies have fought. A large drum lies there. The wind moves nearby branches against its skin, making a loud noise. The jackal is frightened and thinks he should leave before whatever is making the noise sees him.
Then he decides to investigate instead of running away without thinking. He slowly approaches, sees the drum and strikes it himself. His fear now changes into excitement. He imagines that such a large object must contain plenty of meat, fat and blood.
The jackal tears a hole in the tough leather and gets inside. In doing so, he breaks his teeth. Inside the drum he finds nothing to eat, only wood and leather. The object that first frightened him and then promised a feast is empty. The story warns against becoming afraid just because something makes a great noise.
Adapted for Lejrbål from the credited source.
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